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19jun2011

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19jun2011 Powered By Docstoc
					         वतमान
    देशक वतमान दशा और उसका प रणाम

(गत लॉगसे आगेका)
      शंका−जापान,
इजरायल, ि टेन आ द
रा क       जनसं या
ब त कम है, फर भी
वे ब त उ त ह और
भारतक      जनसं या
अिधक है, फर भी यह
बेरोजगारी,      गरीबी
आ दके कारण िपछड़ा आ है ।
अतः भारतके उ थानके कये जनसं याक वृि क
आव यकता नह है, युत जनसं याको कम करनेक
आव यकता है । कारण क एक सह कई बक रय से े
होता है !

       समाधान−म न तो जनसं या बढ़ानेका प पाती ँ
                                   ँ
और न जनसं या घटानेका ही प पाती , युत जनताका
िहत कै से हो−इसका प पाती ँ । जनसं याको बढ़ानेक
इ छा करना भी मूखता है और घटानेक इ छा करना भी
महामूखता है, य क यह काम मनु यका नह है, युत
ई र अथवा कृ ितका है । जनसं याका बढ़ना देशके िलए
घातक नह है, युत संतित-िनरोधके कृ ि म उपय से उसको
कम करनेक चे ा करना महान् घातक है । कारण क इन
               वामी ीरामसुख दासजी महाराज
उपाय के चार- सारसे समाजम य         पसे िभचार,
भोगपरायणता आ द दोष क वृि हो रही है और च र ,
शील, संयम, ल ा आ द गुण का ास हो रहा है । जब
लोग म च र , शील आ द नह रहगे, तो फर देश बलवान्
कै से होगा ? अँ ेज क एक कहावत िस है−

 धन गया तो कु छ नह गया, वा य गया तो कु छ गया,
           च र गया तो सब कु छ गया !

       जापान आ द देश म जो उ ित देखनेम आ रही है,
वह जनसं याके कारण नह है,              युत वहाँके लोग क
कत परायणता, ईमानदारी, प र म, देशभि                    आद
गुण के कारण है । हमारे देशके िपछड़े पन (बेरोजगारी
गरीबी) का कारण जनसं याक वृि                  नह है,     युत
अकम यता, च र हीनता, आल य,                    माद,     ाचार
आ दक वृि         है । पर तु यहाँ कम यता, स च र ता,
संयम, याग आ दक तरफ यान न देकर जनसं याको
कम करनेके उपाय क तरफ ही यान दया जा रहा है, जो
क इन दुगुण को बढ़ानेवाले ह । यह देशके िलए ब त
घातक    है   !    उदाहरणके      िलये− िसनेमा,       वीिडयो,
प −पि का         आ दके    ारा लोग का च र , शील
कया जा रहा है, उनको         िभचार, हसा, चोरी आ दक
िश ा दी जा रही है । जगह-जगह शराबक दूकान

                  वामी ीरामसुखदासजी महाराज
खोलकर, पान-मसाला आ द व तु का                   चार करके
लोग को      सनी बनाया जा रहा है और उनका वा य
न     कया जा रहा है । िविभ      रीितय से लोग को काम
कम करनेक तथा खचा अिधक करनेक , ऐश-आराम
करनेक      ेरणा क जा रही है; जैसे−स ाहम पाँच दन
काम करो, अमुक समय दूकान मत खोलो, आ द ।
कमचारी काम कम कर या न कर, पर उनको वेतन पूरा
दया जाता ह, फर वे काम अिधक करनेका प र म य
कर ? वे ताश खेलने, चाय तथा बीड़ी-िसगरेट पीने आ द
    थके काय म अपना समय बरबाद करते ह । सरकारी
कायालय म ायः घूसके िबना कोई काय िस नह होता ।
    येक   े म   ाचार    ा हो रहा है । जो र क ह, वे
भ क बन रहे ह । िजसको िजस पदके अनुसार काम करना
आता ही नह , उसक िनयुि         उस पदपर के वल जाितके
आधारपर कर दी जाती है । जो यो य             ि    ह, उनको
नौकरी नह िमलती । कू ल म बालक क भरतीके िलए
हजार      पय क घू स ली जाती है और उसको ‘डोनेशन’
(दान) कहा जाता है ! अ यापकलोग कू लम बालक को ठीक
ढंगसे नह पढ़ाते और      ू शन लगानेके िलए े रणा करते ह ।

 (शेष आगेके लॉगम)
−‘देश क वतमान दशा और उसका प रणाम’ पु तकसे

                वामी ीरामसुखदासजी महाराज

				
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posted:6/19/2011
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