Madhushala

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11/19/2008
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भधुशारा भृद ु बावों क अॊगूयं की आज फना रामा हारा, े प्रिमतभ, अऩने ही हाथं से आज प्रऩराऊगा प्मारा, ॉ ऩहरे बोग रगा रूॉ तेया फपय िसाद जग ऩाएगा, सफसे ऩहरे तेया स्वोागत कयती भेयी भधुशारा।।१। प्मास तुझे तो, प्रवोश्व तऩाकय ऩूणण ननकारूॉगा हारा, एक ऩाॉवो से साकी फनकय नाचूगा रेकय प्मारा, ॉ जीवोन की भधुता तो तेये ऊऩय कफ का वोाय चुका, आज ननछावोय कय दॉ गा भं तुझ ऩय जग की भधुशारा।।२। ू प्रिमतभ, तू भेयी हारा है , भं तेया प्मासा प्मारा, अऩने को भुझभं बयकय तू फनता है ऩीनेवोारा, भं तुझको छक छरका कयता, भस्त भुझे ऩी तू होता, एक दसये की हभ दोनं आज ऩयस्ऩय भधुशारा।।३। ू बावोुकता अॊगूय रता से खीॊच कल्ऩना की हारा, कप्रवो साकी फनकय आमा है बयकय कप्रवोता का प्मारा, कबी न कण-बय खारी होगा राख प्रऩएॉ, दो राख प्रऩएॉ! ऩाठकगण हं ऩीनेवोारे, ऩुस्तक भेयी भधुशारा।।४। भधुय बावोनाओॊ की सुभधुय ननत्म फनाता हूॉ हारा, उठा कल्ऩना क हाथं से स्वोमॊ उसे ऩी जाता हूॉ, े बयता हूॉ इस भधु से अऩने अॊतय का प्मासा प्मारा, अऩने ही भं हूॉ भं साकी, ऩीनेवोारा, भधुशारा।।५। भफदयारम जाने को घय से चरता है ऩीनेवोरा, 'फकस ऩथ से जाऊ?' असभॊजस भं है वोह बोराबारा, ॉ अरग-अरग ऩथ फतराते सफ ऩय भं मह फतराता हूॉ 'याह ऩकड़ तू एक चरा चर, ऩा जाएगा भधुशारा।'। ६। चरने ही चरने भं फकतना जीवोन, हाम, प्रफता डारा! 'दय अबी है ', ऩय, कहता है हय ऩथ फतरानेवोारा, ू फहम्भत है न फढू ॉ आगे को साहस है न फपरुॉ ऩीछे , फककतणव्मप्रवोभूढ़ भुझे कय दय खड़ी है भधुशारा।।७। ॊ ू भुख से तू अप्रवोयत कहता जा भधु, भफदया, भादक हारा, हाथं भं अनुबवो कयता जा एक रनरत कल्ल्ऩत प्मारा, ध्मान फकए जा भन भं सुभधुय सुखकय, सुॊदय साकी का, औय फढ़ा चर, ऩनथक, न तुझको दय रगेगी भधुशारा।।८। ू भफदया ऩीने की अनबराषा ही फन जाए जफ हारा, अधयं की आतुयता भं ही जफ आबानसत हो प्मारा, फने ध्मान ही कयते-कयते जफ साकी साकाय, सखे, यहे न हारा, प्मारा, साकी, तुझे नभरेगी भधुशारा।।९। सुन, करकल़ , छरछल़ भधुघट से नगयती प्मारं भं हारा, सुन, रूनझुन रूनझुन चर प्रवोतयण कयती भधु साकीफारा, फस आ ऩहुॊचे, दय नहीॊ कछ, चाय कदभ अफ चरना है , ु ु चहक यहे , सुन, ऩीनेवोारे, भहक यही, रे, भधुशारा।।१०। जरतयॊ ग फजता, जफ चुफन कयता प्मारे को प्मारा, ॊ वोीणा झॊकृत होती, चरती जफ रूनझुन साकीफारा, डाॉट डऩट भधुप्रवोक्रता की ध्वोननत ऩखावोज कयती है , े भधुयवो से भधु की भादकता औय फढ़ाती भधुशारा।।११। भंहदी यॊ ल्जत भृदर हथेरी ऩय भाल्णक भधु का प्मारा, ु अॊगूयी अवोगुॊठन डारे स्वोणण वोणण साकीफारा, ऩाग फंजनी, जाभा नीरा डाट डटे ऩीनेवोारे, इन्द्रधनुष से होड़ रगाती आज यॊ गीरी भधुशारा।।१२। हाथं भं आने से ऩहरे नाज़ फदखाएगा प्मारा, अधयं ऩय आने से ऩहरे अदा फदखाएगी हारा, फहुतेये इनकाय कये गा साकी आने से ऩहरे, ऩनथक, न घफया जाना, ऩहरे भान कये गी भधुशारा।।१३। रार सुया की धाय रऩट सी कह न इसे दे ना ज्वोारा, पननर भफदया है , भत इसको कह दे ना उय का छारा, े ददण नशा है इस भफदया का प्रवोगत स्भृनतमाॉ साकी हं , ऩीड़ा भं आनॊद ल्जसे हो, आए भेयी भधुशारा।।१४। जगती की शीतर हारा सी ऩनथक, नहीॊ भेयी हारा, जगती क ठॊ डे प्मारे सा ऩनथक, नहीॊ भेया प्मारा, े ज्वोार सुया जरते प्मारे भं दग्ध रृदम की कप्रवोता है , जरने से बमबीत न जो हो, आए भेयी भधुशारा।।१५। फहती हारा दे खी, दे खो रऩट उठाती अफ हारा, ू दे खो प्मारा अफ छते ही हंठ जरा दे नेवोारा, 'हंठ नहीॊ, सफ दे ह दहे , ऩय ऩीने को दो फूॊद नभरे' ऐसे भधु क दीवोानं को आज फुराती भधुशारा।।१६। े धभणग्रन्द्थ सफ जरा चुकी है , ल्जसक अॊतय की ज्वोारा, े भॊफदय, भसल्जद, नगरयजे, सफ को तोड़ चुका जो भतवोारा, ऩॊफडत, भोनभन, ऩाफदयमं क पदं को जो काट चुका, े ॊ कय सकती है आज उसी का स्वोागत भेयी भधुशारा।।१७। रारानमत अधयं से ल्जसने, हाम, नहीॊ चूभी हारा, ु हषण-प्रवोकप्रऩत कय से ल्जसने, हा, न छआ भधु का प्मारा, ॊ हाथ ऩकड़ रल्ज्जत साकी को ऩास नहीॊ ल्जसने खीॊचा, व्मथण सुखा डारी जीवोन की उसने भधुभम भधुशारा।।१८। फने ऩुजायी िेभी साकी, गॊगाजर ऩावोन हारा, यहे पयता अप्रवोयत गनत से भधु क प्मारं की भारा' े े 'औय नरमे जा, औय ऩीमे जा', इसी भॊत्र का जाऩ कये ' भं नशवो की िनतभा फन फैठूॊ, भॊफदय हो मह भधुशारा।।१९। फजी न भॊफदय भं घफड़मारी, चढ़ी न िनतभा ऩय भारा, फैठा अऩने बवोन भुअल्ज्ज़न दे कय भल्स्जद भं तारा, रुटे ख़जाने नयप्रऩतमं क नगयीॊ गढ़ं की दीवोायं , े यहं भुफायक ऩीनेवोारे, खुरी यहे मह भधुशारा।।२०। फड़े फड़े प्रऩयवोाय नभटं मं, एक न हो योनेवोारा, हो जाएॉ सुनसान भहर वोे, जहाॉ नथयकतीॊ सुयफारा, याज्म उरट जाएॉ, बूऩं की बाग्म सुरक्ष्भी सो जाए, जभे यहं गे ऩीनेवोारे, जगा कये गी भधुशारा।।२१। सफ नभट जाएॉ, फना यहे गा सुन्द्दय साकी, मभ कारा, सूखं सफ यस, फने यहं गे, फकन्द्तु, हराहर औ' हारा, धूभधाभ औ' चहर ऩहर क स्थान सबी सुनसान फनं, े झगा कये गा अप्रवोयत भयघट, जगा कये गी भधुशारा।।२२। बुया सदा कहरामेगा जग भं फाॉका, भदचॊचर प्मारा, छै र छफीरा, यनसमा साकी, अरफेरा ऩीनेवोारा, ऩटे कहाॉ से, भधु औ' जग की जोड़ी ठीक नहीॊ, जग जजणय िनतदन, िनतऺण, ऩय ननत्म नवोेरी भधुशारा।।२३। प्रफना प्रऩमे जो भधुशारा को फुया कहे , वोह भतवोारा, ऩी रेने ऩय तो उसक भुह ऩय ऩड़ जाएगा तारा, े दास रोफहमं दोनं भं है जीत सुया की, प्मारे की, प्रवोश्वप्रवोजनमनी फनकय जग भं आई भेयी भधुशारा।।२४। हया बया यहता भफदयारम, जग ऩय ऩड़ जाए ऩारा, वोहाॉ भुहयण भ का तभ छाए, महाॉ होनरका की ज्वोारा, स्वोगण रोक से सीधी उतयी वोसुधा ऩय, दख क्मा जाने, ु ऩढ़े भनसणमा दननमा सायी, ईद भनाती भधुशारा।।२५। ु एक फयस भं, एक फाय ही जगती होरी की ज्वोारा, एक फाय ही रगती फाज़ी, जरती दीऩं की भारा, दननमावोारं, फकन्द्तु, फकसी फदन आ भफदयारम भं दे खो, ु फदन को होरी, यात फदवोारी, योज़ भनाती भधुशारा।।२६। नहीॊ जानता कौन, भनुज आमा फनकय ऩीनेवोारा, कौन अप्रऩरयचत उस साकी से, ल्जसने दध प्रऩरा ऩारा, ू जीवोन ऩाकय भानवो ऩीकय भस्त यहे , इस कायण ही, जग भं आकय सफसे ऩहरे ऩाई उसने भधुशारा।।२७। फनी यहं अॊगूय रताएॉ ल्जनसे नभरती है हारा, फनी यहे वोह नभटटी ल्जससे फनता है भधु का प्मारा, फनी यहे वोह भफदय प्रऩऩासा तृप्त न जो होना जाने, फनं यहं मे ऩीने वोारे, फनी यहे मह भधुशारा।।२८। सकशर सभझो भुझको, सकशर यहती मफद साकीफारा, ु ु भॊगर औय अभॊगर सभझे भस्ती भं क्मा भतवोारा, नभत्रं, भेयी ऺेभ न ऩूछो आकय, ऩय भधुशारा की, कहा कयो 'जम याभ' न नभरकय, कहा कयो 'जम भधुशारा'।।२९। सूमण फने भधु का प्रवोक्रता, नसॊधु फने घट, जर, हारा, े फादर फन-फन आए साकी, बूनभ फने भधु का प्मारा, झड़ी रगाकय फयसे भफदया रयभल्झभ, रयभल्झभ, रयभल्झभ कय, फेनर, प्रवोटऩ, तृण फन भं ऩीऊ, वोषाण ऋतु हो भधुशारा।।३०। ॉ तायक भल्णमं से सल्ज्जत नब फन जाए भधु का प्मारा, सीधा कयक बय दी जाए उसभं सागयजर हारा, े भऻल्तऌा सभीयण साकी फनकय अधयं ऩय छरका जाए, परे हं जो सागय तट से प्रवोश्व फने मह भधुशारा।।३१। ै अधयं ऩय हो कोई बी यस ल्जहवोा ऩय रगती हारा, बाजन हो कोई हाथं भं रगता यक्खा है प्मारा, हय सूयत साकी की सूयत भं ऩरयवोनतणत हो जाती, आॉखं क आगे हो कछ बी, आॉखं भं है भधुशारा।।३२। े ु ऩौधे आज फने हं साकी रे रे परं का प्मारा, ू बयी हुई है ल्जसक अॊदय प्रऩयभर-भधु-सुरयबत हारा, े भाॉग भाॉगकय भ्रभयं क दर यस की भफदया ऩीते हं , े झूभ झऩक भद-झॊप्रऩत होते, उऩवोन क्मा है भधुशारा!।३३। िनत यसार तरू साकी सा है , िनत भॊजरयका है प्मारा, छरक यही है ल्जसक फाहय भादक सौयब की हारा, े छक ल्जसको भतवोारी कोमर कक यही डारी डारी ू हय भधुऋतु भं अभयाई भं जग उठती है भधुशारा।।३४। भॊद झकोयं क प्मारं भं भधुऋतु सौयब की हारा े बय बयकय है अननर प्रऩराता फनकय भधु-भद-भतवोारा, हये हये नवो ऩल्रवो, तरूगण, नूतन डारं, वोल्ररयमाॉ, छक छक, झुक झुक झूभ यही हं , भधुफन भं है भधुशारा।।३५। साकी फन आती है िात् जफ अरुणा ऊषा फारा, तायक-भल्ण-भॊफडत चादय दे भोर धया रेती हारा, अगल्णत कय-फकयणं से ल्जसको ऩी, खग ऩागर हो गाते, िनत िबात भं ऩूणण िकृ नत भं भुल्खयत होती भधुशारा।।३६। उतय नशा जफ उसका जाता, आती है सॊध्मा फारा, फड़ी ऩुयानी, फड़ी नशीरी ननत्म ढरा जाती हारा, जीवोन क सॊताऩ शोक सफ इसको ऩीकय नभट जाते े सुया-सुप्त होते भद-रोबी जागृत यहती भधुशारा।।३७। अॊधकाय है भधुप्रवोक्रता, सुन्द्दय साकी शनशफारा े फकयण फकयण भं जो छरकाती जाभ जुम्हाई का हारा, ऩीकय ल्जसको चेतनता खो रेने रगते हं झऩकी तायकदर से ऩीनेवोारे, यात नहीॊ है , भधुशारा।।३८। फकसी ओय भं आॉखं परू, फदखराई दे ती हारा े ॉ फकसी ओय भं आॉखं परू, फदखराई दे ता प्मारा, े ॉ फकसी ओय भं दे ख, भुझको फदखराई दे ता साकी ूॊ फकसी ओय दे ख, फदखराई ऩड़ती भुझको भधुशारा।।३९। ूॊ साकी फन भुयरी आई साथ नरए कय भं प्मारा, ल्जनभं वोह छरकाती राई अधय-सुधा-यस की हारा, मोनगयाज कय सॊगत उसकी नटवोय नागय कहराए, दे खो कसं-कसं को है नाच नचाती भधुशारा।।४०। ै ै वोादक फन भधु का प्रवोक्रता रामा सुय-सुभधुय-हारा, े यानगननमाॉ फन साकी आई बयकय तायं का प्मारा, प्रवोक्रता क सॊकतं ऩय दौड़ रमं, आराऩं भं, े े े ऩान कयाती श्रोतागण को, झॊकृत वोीणा भधुशारा।।४१। नचत्रकाय फन साकी आता रेकय तूरी का प्मारा, ल्जसभं बयकय ऩान कयाता वोह फहु यस-यॊ गी हारा, भन क नचत्र ल्जसे ऩी-ऩीकय यॊ ग-प्रफयॊ गे हो जाते, े नचत्रऩटी ऩय नाच यही है एक भनोहय भधुशारा।।४२। घन श्माभर अॊगूय रता से ल्खॊच ल्खॊच मह आती हारा, अरूण-कभर-कोभर कनरमं की प्मारी, परं का प्मारा, ू रोर फहरोयं साकी फन फन भाल्णक भधु से बय जातीॊ, हॊ स भऻल्तऌा होते ऩी ऩीकय भानसयोवोय भधुशारा।।४३। फहभ श्रेणी अॊगूय रता-सी परी, फहभ जर है हारा, ै चॊचर नफदमाॉ साकी फनकय, बयकय रहयं का प्मारा, कोभर कय-कयं भं अऩने छरकाती नननशफदन चरतीॊ, ू ऩीकय खेत खड़े रहयाते, बायत ऩावोन भधुशारा।।४४। धीय सुतं क रृदम यक्त की आज फना यप्रक्तभ हारा, े वोीय सुतं क वोय शीशं का हाथं भं रेकय प्मारा, े अनत उदाय दानी साकी है आज फनी बायतभाता, स्वोतॊत्रता है तृप्रषत कानरका फनरवोेदी है भधुशारा।।४५। दतकाया भल्स्जद ने भुझको कहकय है ऩीनेवोारा, ु ठु कयामा ठाकयद्वाये ने दे ख हथेरी ऩय प्मारा, ु कहाॉ फठकाना नभरता जग भं बरा अबागे काफपय को? शयणस्थर फनकय न भुझे मफद अऩना रेती भधुशारा।।४६। ऩनथक फना भं घूभ यहा हूॉ, सबी जगह नभरती हारा, भुझे ठहयने का, हे नभत्रं, कष्ट नहीॊ कछ बी होता, ु नभरे न भॊफदय, नभरे न भल्स्जद, नभर जाती है भधुशारा।।४७। सजं न भल्स्जद औय नभाज़ी कहता है अल्रातारा, सबी जगह नभर जाता साकी, सबी जगह नभरता प्मारा, सजधजकय, ऩय, साकी आता, फन ठनकय, ऩीनेवोारा, शेख, कहाॉ तुरना हो सकती भल्स्जद की भफदयारम से नचय प्रवोधवोा है भल्स्जद तेयी, सदा सुहानगन भधुशारा।।४८। फजी नफ़ीयी औय नभाज़ी बूर गमा अल्रातारा, गाज नगयी, ऩय ध्मान सुया भं भग्न यहा ऩीनेवोारा, शेख, फुया भत भानो इसको, साफ़ कहूॉ तो भल्स्जद को अबी मुगं तक नसखराएगी ध्मान रगाना भधुशारा!।४९। भुसरभान औ' फहन्द्द ू है दो, एक, भगय, उनका प्मारा, दोनं यहते एक न जफ तक भल्स्जद भल्न्द्दय भं जाते, फैय फढ़ाते भल्स्जद भल्न्द्दय भेर कयाती भधुशारा!।५०। कोई बी हो शेख नभाज़ी मा ऩॊफडत जऩता भारा, फैय बावो चाहे ल्जतना हो भफदया से यखनेवोारा, एक फाय फस भधुशारा क आगे से होकय ननकरे, े दे खूॉ कसे थाभ न रेती दाभन उसका भधुशारा!।५१। ै औय यसं भं स्वोाद तबी तक, दय जबी तक है हारा, ू एक, भगय, उनका भफदयारम, एक, भगय, उनकी हारा, इतया रं सफ ऩात्र न जफ तक, आगे आता है प्मारा, कय रं ऩूजा शेख, ऩुजायी तफ तक भल्स्जद भल्न्द्दय भं घूॉघट का ऩट खोर न जफ तक झाॉक यही है भधुशारा।।५२। आज कये ऩयहे ज़ जगत, ऩय, कर ऩीनी होगी हारा, आज कये इन्द्काय जगत ऩय कर ऩीना होगा प्मारा, होने दो ऩैदा भद का भहभूद जगत भं कोई, फपय जहाॉ अबी हं भन ्ल् दय भल्स्जद वोहाॉ फनेगी भधुशारा।।५३। मऻ अल्ग्न सी धधक यही है भधु की बटठी की ज्वोारा, ऋप्रष सा ध्मान रगा फैठा है हय भफदया ऩीने वोारा, भुनन कन्द्माओॊ सी भधुघट रे फपयतीॊ साकीफाराएॉ, फकसी तऩोवोन से क्मा कभ है भेयी ऩावोन भधुशारा।।५४। सोभ सुया ऩुयखे ऩीते थे, हभ कहते उसको हारा, रोणकरश ल्जसको कहते थे, आज वोही भधुघट आरा, वोेफदवोफहत मह यस्भ न छोड़ो वोेदं क ठे कदायं, े े मुग मुग से है ऩुजती आई नई नहीॊ है भधुशारा।।५५। वोही वोारूणी जो थी सागय भथकय ननकरी अफ हारा, यॊ बा की सॊतान जगत भं कहराती 'साकीफारा', दे वो अदे वो ल्जसे रे आए, सॊत भहॊ त नभटा दं गे! फकसभं फकतना दभ खभ, इसको खूफ सभझती भधुशारा।।५६। ू कबी न सुन ऩड़ता, 'इसने, हा, छ दी भेयी हारा', कबी न कोई कहता, 'उसने जूठा कय डारा प्मारा', सबी जानत क रोग महाॉ ऩय साथ फैठकय ऩीते हं , े सौ सुधायकं का कयती है काभ अकरे भधुशारा।।५७। े श्रभ, सॊकट, सॊताऩ, सबी तुभ बूरा कयते ऩी हारा, सफक फड़ा तुभ सीख चुक मफद सीखा यहना भतवोारा, े व्मथण फने जाते हो फहयजन, तुभ तो भधुजन ही अच्छे , ठु कयाते फहय भॊल् दयवोारे, ऩरक प्रफछाती भधुशारा।।५८। एक तयह से सफका स्वोागत कयती है साकीफारा, अऻ प्रवोऻ भं है क्मा अॊतय हो जाने ऩय भतवोारा, यॊ क यावो भं बेद हुआ है कबी नहीॊ भफदयारम भं, साम्मवोाद की िथभ िचायक है मह भेयी भधुशारा।।५९। फाय फाय भंने आगे फढ़ आज नहीॊ भाॉगी हारा, सभझ न रेना इससे भुझको साधायण ऩीने वोारा, हो तो रेने दो ऐ साकी दय िथभ सॊकोचं को, ू भेये ही स्वोय से फपय सायी गूॉज उठे गी भधुशारा।।६०। कर? कर ऩय प्रवोश्वास फकमा कफ कयता है ऩीनेवोारा हो सकते कर कय जड़ ल्जनसे फपय फपय आज उठा प्मारा, आज हाथ भं था, वोह खोमा, कर का कौन बयोसा है , कर की हो न भुझे भधुशारा कार कफटर की भधुशारा।।६१। ु आज नभरा अवोसय, तफ फपय क्मं भं न छक जी-बय हारा ूॉ आज नभरा भौका, तफ फपय क्मं ढार न रूॉ जी-बय प्मारा, छे ड़छाड़ अऩने साकी से आज न क्मं जी-बय कय रूॉ, एक फाय ही तो नभरनी है जीवोन की मह भधुशारा।।६२। आज सजीवो फना रो, िेमसी, अऩने अधयं का प्मारा, बय रो, बय रो, बय रो इसभं, मौवोन भधुयस की हारा, औय रगा भेये होठं से बूर हटाना तुभ जाओ, अथक फनू भं ऩीनेवोारा, खुरे िणम की भधुशारा।।६३। सुभुखी तुम्हाया, सुन्द्दय भुख ही, भुझको कन्द्चन का प्मारा छरक यही है ल्जसभॊ े भाल्णक रूऩ भधुय भादक हारा, भं ही साकी फनता, भं ही ऩीने वोारा फनता हूॉ जहाॉ कहीॊ नभर फैठे हभ तुम़ वोहीॊ गमी हो भधुशारा।।६४। दो फदन ही भधु भुझे प्रऩराकय ऊफ उठी साकीफारा, बयकय अफ ल्खसका दे ती है वोह भेये आगे प्मारा, नाज़, अदा, अॊदाजं से अफ, हाम प्रऩराना दय हुआ, ू अफ तो कय दे ती है कवोर फ़ज़ण -अदाई भधुशारा।।६५। े छोटे -से जीवोन भं फकतना प्माय करुॉ , ऩी रूॉ हारा, आने क ही साथ जगत भं कहरामा 'जानेवोारा', े स्वोागत क ही साथ प्रवोदा की होती दे खी तैमायी, े फॊद रगी होने खुरते ही भेयी जीवोन-भधुशारा।।६६। क्मा ऩीना, ननद्वण न्द्द न जफ तक ढारा प्मारं ऩय प्मारा, क्मा जीना, ननयॊ ल् चत न जफ तक साथ यहे साकीफारा, खोने का बम, हाम, रगा है ऩाने क सुख क ऩीछे , े े नभरने का आनॊद न दे ती नभरकय क बी भधुशारा।।६७। े भुझे प्रऩराने को राए हो इतनी थोड़ी-सी हारा! भुझे फदखाने को राए हो एक मही नछछरा प्मारा! इतनी ऩी जीने से अच्छा सागय की रे प्मास भरुॉ , नसॊधॉ ु-तृषा दी फकसने यचकय प्रफॊद-फयाफय भधुशारा।।६८। ु क्मा कहता है , यह न गई अफ तेये बाजन भं हारा, क्मा कहता है , अफ न चरेगी भादक प्मारं की भारा, थोड़ी ऩीकय प्मास फढ़ी तो शेष नहीॊ कछ ऩीने को, ु प्मास फुझाने को फुरवोाकय प्मास फढ़ाती भधुशारा।।६९। नरखी बाग्म भं ल्जतनी फस उतनी ही ऩाएगा हारा, नरखा बाग्म भं जैसा फस वोैसा ही ऩाएगा प्मारा, राख ऩटक तू हाथ ऩाॉवो, ऩय इससे कफ कछ होने का, ु नरखी बाग्म भं जो तेये फस वोही नभरेगी भधुशारा।।७०। कय रे, कय रे कजूसी तू भुझको दे ने भं हारा, ॊ दे रे, दे रे तू भुझको फस मह टू टा पटा प्मारा, ू भं तो सब्र इसी ऩय कयता, तू ऩीछे ऩछताएगी, जफ न यहूॉगा भं, तफ भेयी माद कये गी भधुशारा।।७१। ध्मान भान का, अऩभानं का छोड़ फदमा जफ ऩी हारा, गौयवो बूरा, आमा कय भं जफ से नभट्टी का प्मारा, साकी की अॊदाज़ बयी ल्झड़की भं क्मा अऩभान धया, दननमा बय की ठोकय खाकय ऩाई भंने भधुशारा।।७२। ु ऺीण, ऺुर, ऺणबॊगुय, दफर भानवो नभटटी का प्मारा, ु ण बयी हुई है ल्जसक अॊदय कटु -भधु जीवोन की हारा, े भृत्मु फनी है ननदण म साकी अऩने शत-शत कय परा, ै कार िफर है ऩीनेवोारा, सॊसनत है मह भधुशारा।।७३। ृ प्मारे सा गढ़ हभं फकसी ने बय दी जीवोन की हारा, नशा न बामा, ढारा हभने रे रेकय भधु का प्मारा, जफ जीवोन का ददण उबयता उसे दफाते प्मारे से, जगती क ऩहरे साकी से जूझ यही है भधुशारा।।७४। े अऩने अॊगूयं से तन भं हभने बय री है हारा, क्मा कहते हो, शेख, नयक भं हभं तऩाएगी ज्वोारा, तफ तो भफदया खूफ ल्खॊचेगी औय प्रऩएगा बी कोई, हभं नभक की ज्वोारा भं बी दीख ऩड़े गी भधुशारा।।७५। मभ आएगा रेने जफ, तफ खूफ चरूॉगा ऩी हारा, ऩीड़ा, सॊकट, कष्ट नयक क क्मा सभझेगा भतवोारा, े क्रय, कठोय, कफटर, कप्रवोचायी, अन्द्मामी मभयाजं क ू ु ु े डॊ डं की जफ भाय ऩड़े गी, आड़ कये गी भधुशारा।।७६। मफद इन अधयं से दो फातं िेभ बयी कयती हारा, मफद इन खारी हाथं का जी ऩर बय फहराता प्मारा, हानन फता, जग, तेयी क्मा है , व्मथण भुझे फदनाभ न कय, भेये टू टे फदर का है फस एक ल्खरौना भधुशारा।।७७। माद न आए दखभम जीवोन इससे ऩी रेता हारा, ू जग नचॊताओॊ से यहने को भुक्त, उठा रेता प्मारा, शौक, साध क औय स्वोाद क हे तु प्रऩमा जग कयता है , े े ऩय भै वोह योगी हूॉ ल्जसकी एक दवोा है भधुशारा।।७८। नगयती जाती है फदन िनतदन िणमनी िाणं की हारा रूठ यहा है भुझसे रूऩसी, फदन फदन मौवोन का साकी बग्न हुआ जाता फदन िनतदन सुबगे भेया तन प्मारा, सूख यही है फदन फदन सुन्द्दयी, भेयी जीवोन भधुशारा।।७९। मभ आमेगा साकी फनकय साथ नरए कारी हारा, ऩी न होश भं फपय आएगा सुया-प्रवोसुध मह भतवोारा, मह अॊल् तभ फेहोशी, अॊनतभ साकी, अॊनतभ प्मारा है , ऩनथक, प्माय से ऩीना इसको फपय न नभरेगी भधुशारा।८०। ढरक यही है तन क घट से, सॊनगनी जफ जीवोन हारा े ऩत्र गयर का रे जफ अॊनतभ साकी है आनेवोारा, हाथ स्ऩशण बूरे प्मारे का, स्वोाद सुया जीव्हा बूरे कानो भं तुभ कहती यहना, भधु का प्मारा भधुशारा।।८१। भेये अधयं ऩय हो अॊल् तभ वोस्तु न तुरसीदर प्मारा भेयी जीव्हा ऩय हो अॊनतभ वोस्तु न गॊगाजर हारा, भेये शवो क ऩीछे चरने वोारं माद इसे यखना े याभ नाभ है सत्म न कहना, कहना सच्ची भधुशारा।।८२। भेये शवो ऩय वोह योमे, हो ल्जसक आॊसू भं हारा े आह बये वोो, जो हो सुरयबत भफदया ऩी कय भतवोारा, दे भुझको वोो कान्द्धा ल्जनक ऩग भद डगभग होते हं े औय जरूॊ उस ठौय जहाॊ ऩय कबी यही हो भधुशारा।।८३। औय नचता ऩय जामे उॊ ढे रा ऩत्र न नित का, ऩय प्मारा कठ फॊधे अॊगूय रता भं भध्म न जर हो, ऩय हारा, ॊ िाण प्रिमे मफद श्राध कयो तुभ भेया तो ऐसे कयना ऩीने वोाराॊ े को फुरवोा कऱ खुरवोा दे ना भधुशारा।।८४। नाभ अगय कोई ऩूछे तो, कहना फस ऩीनेवोारा काभ ढारना, औय ढारना सफको भफदया का प्मारा, जानत प्रिमे, ऩूछे मफद कोई कह दे ना दीवोानं की धभण फताना प्मारं की रे भारा जऩना भधुशारा।।८५। ऻात हुआ मभ आने को है रे अऩनी कारी हारा, औय ऩुजायी बूरा ऩूजा, ऻान सबी ऻानी बूरा, फकन्द्तु न बूरा भयकय क बी ऩीनेवोारा भधुशारा।।८६। े मभ रे चरता है भुझको तो, चरने दे रेकय हारा, चरने दे साकी को भेये साथ नरए कय भं प्मारा, स्वोगण, नयक मा जहाॉ कहीॊ बी तेया जी हो रेकय चर, ठौय सबी हं एक तयह क साथ यहे मफद भधुशारा।।८७। े ऩाऩ अगय ऩीना, सभदोषी तो तीनं - साकी फारा, ननत्म प्रऩरानेवोारा प्मारा, ऩी जानेवोारी हारा, साथ इन्द्हं बी रे चर भेये न्द्माम मही फतराता है , कद जहाॉ भं हूॉ, की जाए कद वोहीॊ ऩय भधुशारा।।८८। ै ै ऩॊल् डत अऩनी ऩोथी बूरा, साधू बूर गमा भारा, शाॊत सकी हो अफ तक, साकी, ऩीकय फकस उय की ज्वोारा, 'औय, औय' की यटन रगाता जाता हय ऩीनेवोारा, फकतनी इच्छाएॉ हय जानेवोारा छोड़ महाॉ जाता! फकतने अयभानं की फनकय कब्र खड़ी है भधुशारा।।८९। जो हारा भं चाह यहा था, वोह न नभरी भुझको हारा, जो प्मारा भं भाॉग यहा था, वोह न नभरा भुझको प्मारा, ल्जस साकी क ऩीछे भं था दीवोाना, न नभरा साकी, े ल्जसक ऩीछे था भं ऩागर, हा न नभरी वोह भधुशारा!।९०। े दे ख यहा हूॉ अऩने आगे कफ से भाल्णक-सी हारा, दे ख यहा हूॉ अऩने आगे कफ से कचन का प्मारा, ॊ 'फस अफ ऩामा!'- कह-कह कफ से दौड़ यहा इसक ऩीछे , े फकतु यही है दय ल्ऺनतज-सी भुझसे भेयी भधुशारा।।९१। ॊ ू कबी ननयाशा का तभ नघयता, नछऩ जाता भधु का प्मारा, नछऩ जाती भफदया की आबा, नछऩ जाती साकीफारा, कबी उजारा आशा कयक प्मारा फपय चभका जाती, े आॉल्खभचौरी खेर यही है भुझसे भेयी भधुशारा।।९२। 'आ आगे' कहकय कय ऩीछे कय रेती साकीफारा, हंठ रगाने को कहकय हय फाय हटा रेती प्मारा, नहीॊ भुझे भारूभ कहाॉ तक मह भुझको रे जाएगी, फढ़ा फढ़ाकय भुझको आगे, ऩीछे हटती भधुशारा।।९३। हाथं भं आने-आने भं, हाम, फपसर जाता प्मारा, अधयं ऩय आने-आने भं हाम, ढु रक जाती हारा, दननमावोारो, आकय भेयी फकस्भत की ख़ूफी दे खो, ु यह-यह जाती है फस भुझको नभरते-ल् भरते भधुशारा।।९४। िाप्म नही है तो, हो जाती रुप्त नहीॊ फपय क्मं हारा, िाप्म नही है तो, हो जाता रुप्त नहीॊ फपय क्मं प्मारा, दय न इतनी फहम्भत हारुॉ , ऩास न इतनी ऩा जाऊ, ॉ ू व्मथण भुझे दौड़ाती भरु भं भृगजर फनकय भधुशारा।।९५। नभरे न, ऩय, ररचा ररचा क्मं आकर कयती है हारा, ु नभरे न, ऩय, तयसा तयसाकय क्मं तड़ऩाता है प्मारा, हाम, ननमनत की प्रवोषभ रेखनी भस्तक ऩय मह खोद गई 'दय यहे गी भधु की धाया, ऩास यहे गी भधुशारा!'।९६। ू भफदयारम भं कफ से फैठा, ऩी न सका अफ तक हारा, मत्न सफहत बयता हूॉ, कोई फकतु उरट दे ता प्मारा, ॊ भानवो-फर क आगे ननफणर बाग्म, सुना प्रवोद्यारम भं, े 'बाग्म िफर, भानवो ननफणर' का ऩाठ ऩढ़ाती भधुशारा।।९७। फकस्भत भं था खारी खप्ऩय, खोज यहा था भं प्मारा, ढू ॉ ढ़ यहा था भं भृगनमनी, फकस्भत भं थी भृगछारा, फकसने अऩना बाग्म सभझने भं भुझसा धोखा खामा, फकस्भत भं था अवोघट भयघट, ढू ॉ ढ़ यहा था भधुशारा।।९८। उस प्मारे से प्माय भुझे जो दय हथेरी से प्मारा, ू उस हारा से चावो भुझे जो दय अधय से है हारा, ू प्माय नहीॊ ऩा जाने भं है , ऩाने क अयभानं भं! े ऩा जाता तफ, हाम, न इतनी प्मायी रगती भधुशारा।।९९। साकी क ऩास है नतनक सी श्री, सुख, सॊप्रऩत की हारा, े सफ जग है ऩीने को आतुय रे रे फकस्भत का प्मारा, ये र ठे र कछ आगे फढ़ते, फहुतेये दफकय भयते, ु जीवोन का सॊघषण नहीॊ है , बीड़ बयी है भधुशारा।।१००। साकी, जफ है ऩास तुम्हाये इतनी थोड़ी सी हारा, क्मं ऩीने की अनबरषा से, कयते सफको भतवोारा, हभ प्रऩस प्रऩसकय भयते हं , तुभ नछऩ नछऩकय भुसकाते हो, हाम, हभायी ऩीड़ा से है क्रीड़ा कयती भधुशारा।।१०१। साकी, भय खऩकय मफद कोई आगे कय ऩामा प्मारा, ऩी ऩामा कवोर दो फूॊदं से न अनधक तेयी हारा, े जीवोन बय का, हाम, प्रऩयश्रभ रूट नरमा दो फूॊदं ने, बोरे भानवो को ठगने क हे तु फनी है भधुशारा।।१०२। े ल्जसने भुझको प्मासा यक्खा फनी यहे वोह बी हारा, ल्जसने जीवोन बय दौड़ामा फना यहे वोह बी प्मारा, भतवोारं की ल्जहवोा से हं कबी ननकरते शाऩ नहीॊ, दखी फनाम ल्जसने भुझको सुखी यहे वोह भधुशारा!।१०३। ु नहीॊ चाहता, आगे फढ़कय छीनूॉ औयं की हारा, नहीॊ चाहता, धक्क दे कय, छीनूॉ औयं का प्मारा, े साकी, भेयी ओय न दे खो भुझको नतनक भरार नहीॊ, इतना ही क्मा कभ आॉखं से दे ख यहा हूॉ भधुशारा।।१०४। भद, भफदया, भधु, हारा सुन-सुन कय ही जफ हूॉ भतवोारा, क्मा गनत होगी अधयं क जफ नीचे आएगा प्मारा, े साकी, भेये ऩास न आना भं ऩागर हो जाऊगा, ॉ प्मासा ही भं भस्त, भुफायक हो तुभको ही भधुशारा।।१०५। क्मा भुझको आवोश्मकता है साकी से भाॉगूॉ हारा, क्मा भुझको आवोश्मकता है साकी से चाहूॉ प्मारा, ऩीकय भफदया भस्त हुआ तो प्माय फकमा क्मा भफदया से! भं तो ऩागर हो उठता हूॉ सुन रेता मफद भधुशारा।।१०६। दे ने को जो भुझे कहा था दे न सकी भुझको हारा, दे ने को जो भुझे कहा था दे न सका भुझको प्मारा, सभझ भनुज की दफरता भं कहा नहीॊ कछ बी कयता, ु ु ण फकन्द्तु स्वोमॊ ही दे ख भुझे अफ शयभा जाती भधुशारा।।१०७। एक सभम सॊतुष्ट फहुत था ऩा भं थोड़ी-सी हारा, बोरा-सा था भेया साकी, छोटा-सा भेया प्मारा, छोटे -से इस जग की भेये स्वोगण फराएॉ रेता था, प्रवोस्तृत जग भं, हाम, गई खो भेयी नन्द्ही भधुशारा!।१०८। फहुतेये भफदयारम दे खे, फहुतेयी दे खी हारा, बाॉल् त बाॉल् त का आमा भेये हाथं भं भधु का प्मारा, एक एक से फढ़कय, सुन्द्दय साकी ने सत्काय फकमा, जॉची न आॉखं भं, ऩय, कोई ऩहरी जैसी भधुशारा।।१०९। एक सभम छरका कयती थी भेये अधयं ऩय हारा, एक सभम झूभा कयता था भेये हाथं ऩय प्मारा, एक सभम ऩीनेवोारे, साकी आनरॊगन कयते थे, आज फनी हूॉ ननजणन भयघट, एक सभम थी भधुशारा।।११०। जरा रृदम की बट्टी खीॊची भंने आॉसू की हारा, छरछर छरका कयता इससे ऩर ऩर ऩरकं का प्मारा, आॉखं आज फनी हं साकी, गार गुराफी ऩी होते, कहो न प्रवोयही भुझको, भं हूॉ चरती फपयती भधुशारा!।१११। फकतनी जल्दी यॊ ग फदरती है अऩना चॊचर हारा, फकतनी जल्दी नघसने रगता हाथं भं आकय प्मारा, फकतनी जल्दी साकी का आकषणण घटने रगता है , िात नहीॊ थी वोैसी, जैसी यात रगी थी भधुशारा।।११२। फूॉद फूॉद क हे तु कबी तुझको तयसाएगी हारा, े कबी हाथ से नछन जाएगा तेया मह भादक प्मारा, ऩीनेवोारे, साकी की भीठी फातं भं भत आना, भेये बी गुण मं ही गाती एक फदवोस थी भधुशारा।।११३। छोड़ा भंने ऩथ भतं को तफ कहरामा भतवोारा, चरी सुया भेया ऩग धोने तोड़ा जफ भंने प्मारा, अफ भानी भधुशारा भेये ऩीछे ऩीछे फपयती है , क्मा कायण? अफ छोड़ फदमा है भंने जाना भधुशारा।।११४। मह न सभझना, प्रऩमा हराहर भंने, जफ न नभरी हारा, तफ भंने खप्ऩय अऩनामा रे सकता था जफ प्मारा, जरे रृदम को औय जराना सूझा, भंने भयघट को अऩनामा जफ इन चयणं भं रोट यही थी भधुशारा।।११५। फकतनी आई औय गई ऩी इस भफदयारम भं हारा, टू ट चुकी अफ तक फकतने ही भादक प्मारं की भारा, फकतने साकी अऩना अऩना काभ खतभ कय दय गए, ू फकतने ऩीनेवोारे आए, फकन्द्तु वोही है भधुशारा।।११६। फकतने होठं को यक्खेगी माद बरा भादक हारा, फकतने हाथं को यक्खेगा माद बरा ऩागर प्मारा, फकतनी शक्रं को यक्खेगा माद बरा बोरा साकी, फकतने ऩीनेवोारं भं है एक अकरी भधुशारा।।११७। े दय दय घूभ यहा था जफ भं नचल्राता - हारा! हारा! भुझे न नभरता था भफदयारम, भुझे न नभरता था प्मारा, नभरन हुआ, ऩय नहीॊ नभरनसुख नरखा हुआ था फकस्भत भं, भं अफ जभकय फैठ गमा हॉ , घूभ यही है भधुशारा।।११८। ू भं भफदयारम क अॊदय हूॉ, भेये हाथं भं प्मारा, े प्मारे भं भफदयारम प्रफॊल् फत कयनेवोारी है हारा, इस उधेड़-फुन भं ही भेया साया जीवोन फीत गमा भं भधुशारा क अॊदय मा भेये अॊदय भधुशारा!।११९। े फकसे नहीॊ ऩीने से नाता, फकसे नहीॊ बाता प्मारा, इस जगती क भफदयारम भं तयह-तयह की है हारा, े अऩनी-अऩनी इच्छा क अनुसाय सबी ऩी भदभाते, े एक सबी का भादक साकी, एक सबी की भधुशारा।।१२०। वोह हारा, कय शाॊत सक जो भेये अॊतय की ज्वोारा, े ल्जसभं भं प्रफॊल् फत-िनतफॊल् फत िनतऩर, वोह भेया प्मारा, भधुशारा वोह नहीॊ जहाॉ ऩय भफदया फेची जाती है , बंट जहाॉ भस्ती की नभरती भेयी तो वोह भधुशारा।।१२१। भतवोाराऩन हारा से रे भंने तज दी है हारा, ऩागरऩन रेकय प्मारे से, भंने त्माग फदमा प्मारा, साकी से नभर, साकी भं नभर अऩनाऩन भं बूर गमा, नभर भधुशारा की भधुता भं बूर गमा भं भधुशारा।।१२२। भफदयारम क द्वाय ठंकता फकस्भत का छॊ छा प्मारा, े गहयी, ठॊ डी साॊसं बय बय कहता था हय भतवोारा, फकतनी थोड़ी सी मौवोन की हारा, हा, भं ऩी ऩामा! फॊद हो गई फकतनी जल्दी भेयी जीवोन भधुशारा।।१२३। कहाॉ गमा वोह स्वोनगणक साकी, कहाॉ गमी सुरयबत हारा, कहॉ ा गमा स्वोप्रऩनर भफदयारम, कहाॉ गमा स्वोल्णणभ प्मारा! ऩीनेवोारं ने भफदया का भूल्म, हाम, कफ ऩहचाना? पट चुका जफ भधु का प्मारा, टू ट चुकी जफ भधुशारा।।१२४। ू अऩने मुग भं सफको अनुऩभ ऻात हुई अऩनी हारा, अऩने मुग भं सफको अदबुत ऻात हुआ अऩना प्मारा, फपय बी वोृद्धों से जफ ऩूछा एक मही उऻल्तऌाय ऩामा अफ न यहे वोे ऩीनेवोारे, अफ न यही वोह भधुशारा!।१२५। 'भम' को कयक शुद्धो फदमा अफ नाभ गमा उसको, 'हारा' े 'भीना' को 'भधुऩात्र' फदमा 'सागय' को नाभ गमा 'प्मारा', क्मं न भौरवोी चंक, प्रफचक नतरक-प्रत्रऩुॊडी ऩॊल् डत जी ं ं 'भम-भफहपर' अफ अऩना री है भंने कयक 'भधुशारा'।।१२६। े फकतने भभण जता जाती है फाय-फाय आकय हारा, फकतने बेद फता जाता है फाय-फाय आकय प्मारा, फकतने अथं को सॊकतं से फतरा जाता साकी, े फपय बी ऩीनेवोारं को है एक ऩहे री भधुशारा।।१२७। ल्जतनी फदर की गहयाई हो उतना गहया है प्मारा, ल्जतनी भन की भादकता हो उतनी भादक है हारा, ल्जतनी उय की बावोुकता हो उतना सुन्द्दय साकी है , ल्जतना ही जो रयसक, उसे है उतनी यसभम भधुशारा।।१२८। ु ल्जन अधयं को छए, फना दे भस्त उन्द्हं भेयी हारा, आॉख चाय हं ल्जसकी भेये साकी से दीवोाना हो, ऩागर फनकय नाचे वोह जो आए भेयी भधुशारा।।१२९। ू ल्जस कय को छ ू दे , कय दे प्रवोल्ऺप्त उसे भेया प्मारा, हय ल्जहवोा ऩय दे खी जाएगी भेयी भादक हारा हय कय भं दे खा जाएगा भेये साकी का प्मारा हय घय भं चचाण अफ होगी भेये भधुप्रवोक्रता की े हय आॊगन भं गभक उठे गी भेयी सुरयबत भधुशारा।।१३०। भेयी हारा भं सफने ऩाई अऩनी-अऩनी हारा, भेये प्मारे भं सफने ऩामा अऩना-अऩना प्मारा, भेये साकी भं सफने अऩना प्माया साकी दे खा, ल्जसकी जैसी रुल् च थी उसने वोैसी दे खी भधुशारा।।१३१। मह भफदयारम क आॉसू हं , नहीॊ-नहीॊ भादक हारा, े मह भफदयारम की आॉखं हं , नहीॊ-नहीॊ भधु का प्मारा, फकसी सभम की सुखदस्भृनत है साकी फनकय नाच यही, नहीॊ-नहीॊ फकवो का रृदमाॊगण, मह प्रवोयहाकर भधुशारा।।१३२। ु कचर हसयतं फकतनी अऩनी, हाम, फना ऩामा हारा, ु फकतने अयभानं को कयक ख़ाक फना ऩामा प्मारा! े ऩी ऩीनेवोारे चर दं गे, हाम, न कोई जानेगा, फकतने भन क भहर ढहे तफ खड़ी हुई मह भधुशारा!।१३३। े प्रवोश्व तुम्हाये प्रवोषभम जीवोन भं रा ऩाएगी हारा मफद थोड़ी-सी बी मह भेयी भदभाती साकीफारा, शून्द्म तुम्हायी घफड़माॉ कछ बी मफद मह गुॊल्जत कय ऩाई, ु जन्द्भ सपर सभझेगी जग भं अऩना भेयी भधुशारा।।१३४। फड़े -फड़े नाज़ं से भंने ऩारी है साकीफारा, फकरत कल्ऩना का ही इसने सदा उठामा है प्मारा, भान-दरायं से ही यखना इस भेयी सुकभायी को, ु ु प्रवोश्व, तुम्हाये हाथं भं अफ संऩ यहा हूॉ भधुशारा।।१३५। प्रऩरयशष्ट से स्वोमॊ नहीॊ ऩीता, औयं को, फकन्द्तु प्रऩरा दे ता हारा, ू स्वोमॊ नहीॊ छता, औयं को, ऩय ऩकड़ा दे ता प्मारा, ऩय उऩदे श कशर फहुतेयं से भंने मह सीखा है , ु स्वोमॊ नहीॊ जाता, औयं को ऩहुॊचा दे ता भधुशारा। भं कामस्थ करोदबवो भेये ऩुयखं ने इतना ढ़ारा, ु भेये तन क रोहू भं है ऩचहऻल्तऌाय िनतशत हारा, े ऩुश्तैनी अनधकाय भुझे है भफदयारम क आॉगन ऩय, े भेये दादं ऩयदादं क हाथ प्रफकी थी भधुशारा। े फहुतं क नसय चाय फदनं तक चढ़कय उतय गई हारा, े ऩय फढ़ती तासीय सुया की साथ सभम क, इससे ही े औय ऩुयानी होकय भेयी औय नशीरी भधुशारा। प्रऩत्र ऩऺ भं ऩुत्र उठाना अध्मण न कय भं, ऩय प्मारा फैठ कहीॊ ऩय जाना, गॊगा सागय भं बयकय हारा फकसी जगह की नभटटी बीगे, तृनप्त भुझे नभर जाएगी तऩणण अऩणण कयना भुझको, ऩढ़ ऩढ़ कय क भधुशारा। े - फच्चन फहुतं क हाथं भं दो फदन छरक झरक यीता प्मारा, े

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