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Village Lifestyle

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					भारत की आत्मा गााँव मे बस्ती है कथन आपने सुना ही होगा । हमारे देश की लगभग ८०%
जनसंख्या गााँव में ननवास करती है । आपने यह भी सुना होगा की गााँव बहुत ही खुश्हक तथा
खुशहाल जीवन नमलता है , कु छ सालों पहले तक यह कथन सत्य था । लेककन आजकल यह आधा
सच है । पहले गााँव में पानी याँ ही बहता था , हरे भरे खेत लहलहाते थे , दध ,दही घी मक्खन
की कोई कमी नहीं थी , गााँव के लोग सीधे साधे थे तथा कोई बेध्भाव नहीं था । ककसी एक दुुःख
होने पर सभी साझा करते थे उसी तरह से ख़ुशी भी सभी नमलकर साझा करते थे ।कोई छोटा
मोटा मामला आ भी जाता तो पंचायत द्वारा सुलझा नलया जाता । सभी गााँव वाले नमलजुलकर
शाम को एक साथ चौपाल पर बैठकर गीत गाया करते थे तथा मनहलाएाँ भी आपस में गाती
बजाती थी । कोई चोरी, डकै ती , लटपाट नहीं होती थी । पहले गााँव में ईमानदारी व्याप्त थी ।
गााँव के लोग भगवान से डरते थे तथा बुरे कमो से बचते थे तथा गााँव का वातावरण एकदम
प्रदुषण रनहत था । लोगों के घरों में कई प्रकार के जानवर नमल जाते थे । अनवभक्त पररवार
था। गााँव में गरीबी थी लेककन लोग खुश रहते थे । लेककन ये ख़ुशी शहर से देखी नहीं गयी तथा
उसने एक जाल फें का तथा लोगों को शहर की तरफ आकर्षषत करना शुरु कर कदया और गााँव कम
होते चले गए । हमारे देश में करीब छह लाख गााँव हैं। भारतीय गांवों की जीवन शैली एक बहुत
ही सुंदर और आकषषक जीवन शैली है। सारे गााँव शहरों के जीवन की हलचल से मुक्त रहते हैं,

गांवों में शांनत, और हररयाली होती है ,जहां कोई भी ताजा हवा में सांस ले सकता हैं। गांवों की
सुंदरता का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कक ग्रामीण लोग खुशी से छोटे झोपनडयााँ
और नमट्टी द्वारा बनाए गए घरों में रहते हैं। सामने पेड़ के साथ एक बड़ा खुला क्षेत्र और पीछे
बांस से नघरा हुआ एक वनस्पनत उद्यान। ग्रामीण लोग सामानजक रूप से एक साथ जुड़े रहते हैं,
हर शाम वे गााँव के चौपाल में बैठकर देर रात तक बातें करतें हैं ।भारतीय गांवों में घर बांस
और कीचड़ द्वारा बनाए जाते हैं।जो प्रकृ नत के अनुकल हैं। भारतीय गांवों में घर ज्यादातर फस
और बांस की छतों के साथ बनाया जाते है। गााँव के घरों की दीवार और फशष नमट्टी और घास के
एक नमश्रण द्वारा नचनत्रत करे जातें हैं। बाररश के पहले और बाद में, इन घरों को रख- रखाव की

जरूरत होती है। जो लोग गांवों में रहते हैं उनमें अनधकांश ककसान होते हैं अन्य लोग कु म्हार,

बढ़ई, लोहार के रूप में कायष करतें हैं। बैलों का इस्तेमाल खेती और क्षेत्र में अन्य गनतनवनधयों के

नलए होता हैं। मनहलाएाँ धान रोपण का काम करती हैं, जबकक पुरुष बैलगाड़ी चलाने और उससे
नई नमट्टी को जोतने का काम करतें हैं । भारत के गांवों में लोगों शैनक्षक नस्थनत ज्यादा अच्छी
नहीं है, कु छ गांवों में तो नवद्यालय ही नहीं हैं। कु छ गााँवों में तो पानी की आपर्षत, घर के अंदर

शौचालय और नबजली भी नहीं हैं। नदी का पानी, हाथ पंप और कु एाँ पानी का मुख्य स्रोत हैं ।

भारत के गांवों में जीवन हर क्षेत्र में अलग हैं, इन भारतीय गांवों में भारत के प्रनसद्ध आकदवासी

समह रहते हैं।ग्रामीणों की जीवन शैली बहुत सीधी साधी होती है। वे बड़ा घर, वाहन, पैसा,

आकद,का सपना नहीं देखते , उनके पास जो कु छ होता है वे उसी में खुश रहते हैं। जो वातावरण
गााँवों में नमल सकता वो संसार के ककसी भी शहर में नही नमल सकता । लेककन आजकल नए
उद्योगों की स्थापना के कारण गााँवों का वातावरण भी प्रदनषत हो रहा है । रोज़गार के अवसर
कम होने की वजह से बहुत से लोग गांवों को छोड़कर शहरों में बस रहे हैं । गााँवों को नवकनसत
करने के नलए सरकार को उनचत कदम उठाने चानहए । नबजली , नवद्यालय , अस्पताल को हर
  ाँ
गोव में उपलब्ध कराना चानहए । नपछड़े राज्यों के गावों में कई सुनवधाओं का अभाव है । गााँव के
लोग अभी भी अंधनवश्वास से नघरे हैं ।गााँव में जीवन करठन है । पुरुष सर्ददयों की रठठु रने वाली
सदी और गर्षमयों की नचलनचलाती धप में काम करते हैं और मनहलाओं को सुबह उठकर भोजन
तैयार करना पड़ना है । गााँवों में लोगों की शैनक्षक नस्थनत ज्यादा अच्छी नही है । कु छ लोगों को
तो अपना नाम भी नलखना नही आता । कु छ गााँवों में नवद्यालय ही नही है । अंत में सरकार को
जल्द से जल्द गााँवों की नस्थनत को सुधारना चानहए नही तो ये सुंदर गााँव शहरीकरण के कारण
नवलुप्त हो जाएाँगें और इनके साथ-साथ हमारी भारतीय संस्कृ नत भी नष्ट हो जाएगी ।

				
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posted:5/9/2012
language:Hindi
pages:2
Description: Village Lifestyle Speech and Essay